Dil Ki Sun

मेरे साथ बिताये लम्हे के हर पल को संजोग के रखना ऐ मेरे दोस्त क्योकि हम याद तो तुम्हे बहुत आयेंगे पर लौट के नहीं । Love U NESARK
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Thursday, 8 September 2016

हम है देसी


*****
By-Kumar Vishwas
एशिया  के  हम  परिंदे , आसमा  है  हद  हमारी ,
जानते  है  चाँद  सूरज , जिद  हमारी  ज़द  हमारी ,
हम  वही  जिसने  समंदर  की , लहर  पर  बाँध  साधा ,
हम  वही  जिनके  के  लिए  दिन , रात  की  उपजी  न  बाधा,
हम  की  जो  धरती  को  माता , मान  कर  सम्मान  देते ,
हम  की  वो  जो  चलने  से  पहले , मंजिले  पहचान  लेते ,
हम  वही  जो  शून्य  मैं  भी , शून्य  रचते  हैं   निरंतर ,
हम  वही  जो  रौशनी  रखते , है  सबकी  चौखटों   पर ,
उन  उजालो  का  वही , पैगाम  ले  आए  है  हम ,
हम  है  देसी  हम  है  देसी  हम  है  देसी ,
हा  मगर  हर  देश  छाए  है  हम…..

ज़िंदा  रहने  का  असल  अंदाज़ , सिखलाये  है  हमने ,
ज़िंदगी  है  ज़िंदगी  के , बाद  समझाया  है  हमने ,
हमने  बतलाया  की , कुदरत  का  असल  अंदाज़  क्या  है ,
रंग  क्या  है  रूप  क्या  है , महक  क्या  है  स्वाद  क्या  है ,
हमने  दुनिया  मोहबत , का  असर  ज़िंदा  किया  है ,
हमने  नफरत  को  गले  मिल , मिल  के  शर्मिंदा  किया  है ,
इन  तरर्की  के  खुदाओं , ने  तो  घर  को  दर  बनाया ,
इन  पड़े  खली  मकानो , को  हमी  ने  घर  बनाया ,
हम  न  आते  तो  तरक्की , इस  कदर  न  बोल  पाती,
हम  न  आते  तो  ये  दुनिया , खिड़किया  न  खोल  पाती,
है  यसोदा  के  यहाँ पर , देवकी  जाये  है  हम ,
हम  है  देसी  हम  है  देसी  हम  है  देसी ,
हा  मगर  हर  देश  छाए  है  हम ……………

Tuesday, 6 September 2016

Jiski dhun per duniya nache


जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है.
जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो ,जाती है हर उम्र मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े , उसका नाम मोहब्बत है .
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ? 
बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन.
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ,
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ,
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन,
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार का किस्सा,
कभी तुम सुन नहीं पायी, कभी मैं कह नहीं पाया !

Tumhari chat pe nigrani bahut h


तुम्हें जीने में आसानी बहुत है
तुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है

ज़हर-सूली ने गाली-गोलियों ने 
हमारी जात पहचानी बहुत है

कबूतर इश्क का उतरे तो कैसे 
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर ख़ुदकुशी का 
तो खुद की आखँ का पानी बहुत है

तुम्हारे दिल की मनमानी मेरी जाँ
हमारे दिल ने भी मानी बहुत है

Swarg kr dwar tak


मैं तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक
रोज़ जाता रहा, रोज़ आता रहा
तुम ग़ज़ल बन गईं, गीत में ढल गईं
मंच से मैं तुम्हें गुनगुनाता रहा

ज़िन्दगी के सभी रास्ते एक थे
सबकी मंज़िल तुम्हारे चयन तक रही
अप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद्
मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहीं
प्राण के पृष्ठ पर प्रीति की अल्पना
तुम मिटाती रहीं मैं बनाता रहा

एक ख़ामोश हलचल बनी ज़िन्दगी
गहरा ठहरा हुआ जल बनी ज़िन्दगी
तुम बिना जैसे महलों मे बीता हुआ
उर्मिला का कोई पल बनी ज़िन्दगी
दृष्टि आकाश में आस का इक दीया
तुम बुझाती रहीं, मैं जलाता रहा

तुम चली तो गईं, मन अकेला हुआ
सारी यादों का पुरज़ोर मेला हुआ
जब भी लौटीं नई ख़ुश्बुओं में सजीं
मन भी बेला हुआ, तन भी बेला हुआ
ख़ुद के आघात पर, व्यर्थ की बात पर
रूठतीं तुम रहीं मैं मनाता रहा

Hoto per GANGA ho


दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में
जीते-जी इसका मान रखें
मर कर मर्यादा याद रहे
हम रहें कभी ना रहें मगर
इसकी सज-धज आबाद रहे
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें
हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें
परवरदिगार,मैं तेरे द्वार
पर ले पुकार ये आया हूं
चाहे अज़ान ना सुनें कान
पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें
जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

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